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सोनिया गांधी की आत्मकथा 'Belonging' पर सियासी घमासान: भारत में प्रकाशन रुकने पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा

29 August 2026

AI News Reader

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सोनिया गांधी की आत्मकथा 'Belonging' पर सियासी घमासान: भारत में प्रकाशन रुकने पर कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा

नई दिल्ली |कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की बहुचर्चित आत्मकथा को लेकर देश के सियासी गलियारों में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की आलोचना वाले हिस्सों को हटाने से सोनिया गांधी द्वारा इनकार किए जाने के बाद, पब्लिशिंग हाउस 'पेंग्विन इंडिया' (Penguin India) ने इस किताब को भारत में प्रकाशित करने से मना कर दिया है।

इस घटनाक्रम के सामने आते ही कांग्रेस पार्टी ने प्रकाशक और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार के राजनीतिक दबाव के चलते पब्लिशिंग हाउस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंट रहा है।

क्या है विवाद की मुख्य वजह?

सोनिया गांधी के संस्मरणों पर आधारित आत्मकथा का नाम 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' (Belonging: A Journey of Love) रखा गया है। इसे आगामी 10 नवंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज किया जाना तय था, जिसकी घोषणा पेंग्विन रैंडम हाउस के सहयोगी पब्लिशर 'अल्फ्रेड ए. नॉपफ' (Alfred A. Knopf) ने की थी।

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय प्रकाशक (पेंग्विन इंडिया) किताब के उन अध्यायों में बदलाव या उन्हें हटाने की मांग कर रहा था, जिनमें:

वर्ष 2014 के बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए गए हैं।

विशेष रूप से भारत-चीन संबंधों को लेकर सरकार के रुख की आलोचना की गई है।

भाजपा के वैचारिक मार्गदर्शक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका पर कड़े राजनीतिक विचार दर्ज हैं।

सोनिया गांधी द्वारा अपनी मूल पांडुलिपि (ड्राफ्ट) में किसी भी प्रकार की कांट-छांट या बदलाव करने से साफ मना करने के बाद पेंग्विन इंडिया ने भारत में इसके प्रकाशन से हाथ पीछे खींच लिए।

कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के तीखे बयान: "उत्तर कोरिया जैसा व्यवहार"

इस विवाद पर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) और शीर्ष पदाधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है:

बी.के. हरिप्रसाद (CWC सदस्य): "यह पेंग्विन इंडिया का पूरी तरह से अलोकतांत्रिक रुख है। साफ है कि पब्लिशर पर सरकार की तरफ से भारी दबाव है। कोई भी प्रकाशक किसी लेखक को उसकी आत्मकथा बदलने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। ऐसा रवैया सिर्फ उत्तर कोरिया में ही देखने को मिलता है। मुख्य विपक्षी दल होने के नाते सरकार की कमियों को उजागर करना हमारा लोकतांत्रिक कर्तव्य है।"

के. राजू (CWC सदस्य): "यह बेहद हैरान करने वाला है कि जो किताब पूरी दुनिया में छप सकती है, वह भारत में छपने लायक नहीं बची! पेंग्विन इंडिया मोदी सरकार के दबाव के आगे घुटने टेक रहा है। यह पब्लिशिंग इंडस्ट्री की साख पर काला धब्बा है। सच को किसी सेंसरशिप की जरूरत नहीं होती।"

बी.एम. संदीप (AICC पदाधिकारी): "सोनिया गांधी ने 2004 से 2014 तक यूपीए का सफल नेतृत्व किया और भारतीय मूल्यों को दिल से अपनाया। भाजपा ने हमेशा उनके विदेशी मूल को मुद्दा बनाया जिसे जनता ने खारिज किया। उनका जीवन पूरी तरह खुली किताब और प्रेरणादायक रहा है।"

पेंग्विन इंडिया की सफाई: 'फैक्ट चेक करना हमारा अधिकार'

विवाद बढ़ने के बाद पेंग्विन इंडिया ने सार्वजनिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि वह इस किताब को भारत में पब्लिश नहीं कर रही है, हालांकि वे इसे छापने के बेहद उत्सुक थे।

पब्लिशर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि किसी भी किताब के 'तथ्यों की जांच' (Fact Checking) करना और लेखक को किताब के 'सर्वोत्तम हित' में रचनात्मक सुझाव देना एक प्रकाशक का विशेषाधिकार और पेशेवर जिम्मेदारी दोनों है।

क्या है सोनिया गांधी की किताब में खास?

'Belonging: A Journey of Love' सोनिया गांधी के संपूर्ण जीवन की अनकही कहानियों को समेटे हुए है:

शुरुआती जीवन: इटली में बीता उनका बचपन और पारिवारिक पृष्ठभूमि।

राजीव गांधी से मुलाकात: साल 1965 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में राजीव गांधी से पहली मुलाकात और विवाह।

भारत आगमन और सियासत: भारत की बहू बनने से लेकर राजनीति में कदम रखने, 2004 से 2014 तक UPA सरकार के संचालन और 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने तक के अहम राजनीतिक व व्यक्तिगत अनुभवों का ब्योरा।